विपिन शर्मा की रिकवरी, शिक्षा और पीयर-लीडरशिप की यात्रा
लेखक: विपिन शर्मा
अध्यक्ष, Ankush Foundation | State Level Coordination Agency (SLCA), Haryana
हाल ही में प्रधानमंत्री के मन की बात में नशामुक्ति की राह पर आगे बढ़ रहे युवाओं को “real warriors” कहकर संबोधित किया गया। यह केवल प्रशंसा के शब्द नहीं हैं। यह उस संघर्ष की सामाजिक पहचान है, जिसे नशे से उबरने वाला व्यक्ति, उसका परिवार और उसका समुदाय लंबे समय तक साथ लेकर चलते हैं।
लेकिन सवाल यह है—क्या नशामुक्ति केवल दवा, डॉक्टर और उपचार से पूरी हो सकती है?
हाल ही में Hindustan Times में प्रकाशित किरण बेदी के लेख “Why addiction strategy demands social overhaul” ने इसी सवाल को सामने रखा। लेख का मूल संदेश स्पष्ट है: दवा उपचार का हिस्सा हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रिकवरी परिवार, साथियों, सार्थक काम, स्थिर रिश्तों और ऐसे समुदायों पर भी निर्भर करती है जो व्यक्ति को उम्मीद और अपनापन देते हैं।
मेरी अपनी जिंदगी इस बात की एक छोटी-सी मिसाल है।
मैं कभी मदद लेने वाला व्यक्ति था
मेरी रिकवरी की शुरुआत उस समय हुई जब मेरे जीवन में नशे का प्रभाव गहरा था। मुझे उपचार और सहयोग मिला। उस यात्रा में मुझे ऐसे लोगों का साथ मिला, जिन्होंने मुझे केवल “एक मरीज” के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में देखा जिसमें बदलाव की क्षमता थी।
इसी यात्रा में मेरा संपर्क रोशन लाल से हुआ, जो Navjyoti के UN-supported Rehabilitation Project में प्रशिक्षित पीयर सपोर्ट कार्यकर्ताओं में से एक थे। उस परियोजना में recovering addicts और co-dependents को peer support counsellors और community workers के रूप में प्रशिक्षित किया गया था। प्रशिक्षण में counselling, communication, family counselling, community outreach, campaign planning, first aid और teamwork जैसे क्षेत्र शामिल थे।
यही सोच मेरे लिए महत्वपूर्ण बनी—जिस व्यक्ति ने संघर्ष देखा है, वह किसी दूसरे संघर्षरत व्यक्ति तक एक अलग तरह से पहुंच सकता है।
Navjyoti के उस मॉडल में recovering persons को केवल सहायता प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि आगे चलकर दूसरों की मदद करने वाला व्यक्ति बनने का अवसर दिया गया था। उपलब्ध दस्तावेज़ों में peer-led recovery और recovering persons को peer support counsellors तथा community workers के रूप में तैयार करने की इस दिशा का उल्लेख मिलता है।
मेरे जीवन में सामाजिक कार्य की शिक्षा भी इसी परिवर्तन का हिस्सा बनी। रिकवरी के बाद मैंने MSW पूरा किया। मेरे लिए यह केवल एक डिग्री नहीं थी; यह अपने अनुभव को समझने और उसे सामाजिक सेवा में बदलने की प्रक्रिया थी।
रिकवरी के बाद सवाल बदल गया
एक समय मेरा सवाल था—
“मैं कैसे ठीक होऊँ?”
बाद में सवाल बदलकर हो गया—
“मैं किसी और को ठीक होने की राह पर कैसे साथ दे सकता हूँ?”
यहीं से मेरी यात्रा help-seeker से helper और फिर peer leader बनने की ओर बढ़ी।
Ankush Foundation इसी सोच के साथ आगे बढ़ी। संस्था का उद्देश्य नशे से प्रभावित लोगों को उपचार, पुनर्वास, मनो-सामाजिक सहयोग और आवश्यक सेवाओं से जोड़ना रहा है। आज peer-led rehabilitation और peer support मेरे काम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हरियाणा में peer-led drug rehabilitation centres के साथ काम करते हुए मैंने बार-बार देखा है कि रिकवरी केवल क्लिनिक के कमरे में नहीं होती।
वह परिवार में होती है।
वह दोस्ती में होती है।
वह रोजगार में होती है।
वह समुदाय में होती है।
और कभी-कभी वह उस एक व्यक्ति के विश्वास में होती है जो कहता है—
“मैं तुम्हें समझता हूँ, क्योंकि मैं भी इस रास्ते से गुजर चुका हूँ।”
Suneel Vatsyayan' mentorship
इस यात्रा में Suneel Vatsyayan की mentorship का महत्व मेरे लिए विशेष रहा है।
Navjyoti के अनुभव में peer-led recovery को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि पुनर्वास की व्यापक सामाजिक प्रक्रिया के हिस्से के रूप में विकसित किया गया। UN-supported project में recovering persons और co-dependents को प्रशिक्षित कर उन्हें community-based roles के लिए तैयार किया गया था।
अनुज जौहरी भी उसी UN-supported Navjyoti Rehabilitation Project से जुड़े प्रशिक्षित लोगों में रहे हैं। ऐसे लोगों ने यह दिखाया कि recovery का अंतिम पड़ाव केवल “नशा छोड़ देना” नहीं है। व्यक्ति की पहचान, जिम्मेदारी और सामाजिक भूमिका का पुनर्निर्माण भी recovery का हिस्सा है।
मेरे लिए mentorship का अर्थ केवल सलाह लेना नहीं रहा। इसका अर्थ था—अपने अनुभव को समझना, अपनी सीमाओं को पहचानना और फिर उस अनुभव को दूसरों के लिए उपयोगी बनाना।
दवा जरूरी हो सकती है—लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं होती
आज addiction के उपचार में medication और clinical services की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन यदि हम केवल prescription और medicine पर निर्भर हो जाएँ, तो हम recovery के उस बड़े सामाजिक हिस्से को भूल सकते हैं जिसमें व्यक्ति वास्तव में अपना जीवन दोबारा बनाता है।
किरण बेदी ने भी अपने लेख में इसी चिंता को रेखांकित किया है दवा उपचार अकेले दीर्घकालिक recovery सुनिश्चित नहीं करता; परिवार, peer support, counselling, psychosocial rehabilitation, meaningful work और community support आवश्यक हैं। पंजाब में भी उपचार और दवाओं के साथ counselling, rehabilitation और psychosocial support को मजबूत करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं।
यह सवाल केवल सरकार का नहीं है।
यह परिवार का भी है।
यह स्कूल और कॉलेज का भी है।
यह workplace का भी है।
यह civil society का भी है।
और सबसे बढ़कर, यह हमारे समाज का सवाल है।
पीयर केवल “पूर्व मरीज” नहीं है
पीयर सपोर्ट को अक्सर हम एक recovering person की कहानी सुनाने तक सीमित कर देते हैं। मेरे अनुभव में यह उससे कहीं बड़ा है।
एक trained peer व्यक्ति को सुन सकता है।
उसकी चुप्पी को समझ सकता है।
उसके परिवार की बेचैनी को समझ सकता है।
उसे treatment से जोड़ सकता है।
और सबसे महत्वपूर्ण—उसे यह एहसास दिला सकता है कि उसकी जिंदगी अभी खत्म नहीं हुई है।
लेकिन peer support का मतलब clinical care का विकल्प बनना भी नहीं है। डॉक्टर, counsellor और अन्य professionals की अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ हैं। Peer की ताकत उसकी lived experience, भरोसे और साथ चलने की क्षमता में है।
यही संतुलन हमें बनाना होगा।
“Real Warriors” को आगे की भूमिका भी चाहिए
प्रधानमंत्री ने जिन लोगों को “real warriors” कहा, उन्हें केवल inspirational stories के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।
हमें उन्हें recovery के भागीदार बनाना होगा।
जो व्यक्ति recover कर चुका है, उसे केवल यह प्रमाण देने के लिए मंच पर न बुलाया जाए कि उसने नशा छोड़ दिया है। उसे training दी जाए। उसे peer counsellor बनाया जाए। उसे community work का अवसर मिले। उसे रोजगार और social entrepreneurship से जोड़ा जाए। उसकी आवाज़ policy और programme design में सुनी जाए।
क्योंकि recovery की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं कि एक व्यक्ति ने नशा छोड़ दिया।
सबसे बड़ी उपलब्धि तब है जब वही व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को गिरने से रोकने, उपचार तक पहुँचाने या दोबारा जीवन बनाने में मदद करता है।
मेरी कहानी का अर्थ
मैं अपनी कहानी को सफलता की व्यक्तिगत कहानी के रूप में नहीं देखता।
मेरी कहानी उन लोगों की कहानी है जिन्होंने किसी समय मेरा हाथ पकड़ा।
रोशन जैसे peer worker।
अनुज जैसे mentors और साथ चलने वाले लोग।
Suneel Vatsyayan जैसे mentor जिन्होंने lived experience को सामाजिक नेतृत्व में बदलने की संभावना को पहचाना।
और वे सभी परिवार, कार्यकर्ता और साथी जिन्होंने recovery को केवल treatment नहीं, बल्कि जीवन का पुनर्निर्माण माना।
आज जब मैं peer-led rehabilitation के साथ काम करता हूँ, तो मुझे अपनी यात्रा का एक सरल अर्थ दिखाई देता है—
मैं कभी मदद लेने वाला था।
मैंने सीखा।
मैं recover हुआ।
मैंने MSW किया।
और फिर मैंने दूसरों की मदद करना शुरू किया।
यही recovery की असली शक्ति है।
नशामुक्ति केवल नशा छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है।
यह व्यक्ति को फिर से परिवार, काम, समुदाय और समाज से जोड़ने की प्रक्रिया है।
और शायद इसी लिए हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए—
“व्यक्ति ने नशा कब छोड़ा?”
हमें यह भी पूछना चाहिए—
“रिकवरी के बाद समाज ने उसे क्या बनने का अवसर दिया?”
Prevention is Social. Recovery is Social. And lived experience must have a place at the table.
— विपिन शर्मा
President, Ankush Foundation | State Level Coordination Agency (SLCA), Haryana
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